बलरामपुर में ‘नगर पालिका संपत्ति कांड’! टैंकर-ट्रैक्टर बेचने का आरोप, FIR की मांग से मचा हड़कंप


📍बलरामपुर।

नगर पालिका परिषद बलरामपुर में शासकीय संपत्तियों की कथित अवैध बिक्री का मामला अब बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। वार्ड क्रमांक 14 के पार्षद गौतम सिंह ने इस पूरे प्रकरण को लेकर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन को विस्तृत शिकायत भेजते हुए उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

पार्षद ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि नगर पालिका की कई महत्वपूर्ण संपत्तियों को नियमों को ताक पर रखकर बेच दिया गया। इस पूरे मामले में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) प्रणव राय की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

शिकायत के अनुसार—

15 से अधिक पानी के टैंकर कथित रूप से बेच दिए गए
एक पुराना एचएमटी ट्रैक्टर-ट्रॉली भी विक्रय कर दिया गया
पुराने बाजार का शेड तक हटाकर बेचने का आरोप

इन सभी मामलों में न तो परिषद की अनुमति ली गई और न ही खुली निविदा प्रक्रिया अपनाई गई, जो कि शासकीय संपत्तियों के विक्रय के लिए अनिवार्य मानी जाती है।

बरामद टैंकर ने बढ़ाई हलचल

मामला उस वक्त और गंभीर हो गया जब 2 अप्रैल 2026 को वार्ड क्रमांक 12 स्थित एक वेल्डिंग शॉप से एक पानी का टैंकर बरामद किया गया। बताया बेचा गया था। इस घटना के बाद पूरे प्रकरण ने तूल पकड़ लिया है। पार्षद ने इस संबंध में थाना बलरामपुर में भी शिकायत दर्ज कराई है।

पार्षद की बड़ी मांगें

गौतम सिंह ने शासन से मांग की है कि—

* पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए
* दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज हो
* नगरपालिका के स्टॉक रजिस्टर और अभिलेख जब्त किए जाएं
* सभी संपत्तियों का विशेष ऑडिट कराया जाए
* जांच प्रभावित न हो, इसलिए संबंधित सीएमओ को पद से हटाया जाए

दस्तावेजों से छेड़छाड़ की आशंका

पार्षद ने यह भी आशंका जताई है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो महत्वपूर्ण दस्तावेजों में हेरफेर हो सकती है, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है। उन्होंने अभिलेखों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई है।

जनता में आक्रोश, उठे पारदर्शिता पर सवाल

मामला सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि नगरपालिका की संपत्तियां जनता की होती हैं और यदि इन्हें नियमों के खिलाफ बेचा गया है तो यह सीधे-सीधे जनता के अधिकारों का हनन है।
यह मामला न केवल आर्थिक नुकसान से जुड़ा है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जनविश्वास पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

अब आगे क्या?

फिलहाल नगर पालिका प्रशासन या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नगरीय प्रशासन विभाग और पुलिस इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और जांच में क्या सच्चाई सामने आती है।

यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला बलरामपुर के सबसे बड़े नगर पालिका घोटालों में से एक बन सकता है।

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