भवन बना, पर ताला पड़ा!” — कुसमी का डीआईईटी बना इंतजार की कहानी

“कुसमी को झटका: तैयार भवन के बावजूद डीआईईटी शिफ्ट की चर्चा”

✍️रिपोर्टर: दुर्गेश गुप्ता

बलरामपुर/कुसमी | 05 अप्रैल 2026/ कभी शिक्षा के नए सूरज की तरह देखा जा रहा डीआईईटी अब अनिश्चितता के बादलों में घिरता नजर आ रहा है। राज्य शासन ने बड़े उत्साह के साथ कुसमी स्थित बीआईटीई को उन्नत कर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डीआईईटी) का दर्जा दिया था। यह फैसला रायपुर से जारी आदेश क्रमांक एफ 17-07/2025/20-एक, दिनांक 16 जून 2025 के तहत लिया गया।

योजना साफ थी—नया भवन, नई शुरुआत और 2026-27 सत्र से पढ़ाई। लेकिन अब हालात कुछ और कहानी बयां कर रहे हैं। उम्मीदों का भवन, अनिश्चितता की दीवारें ।

कुसमी में बना अत्याधुनिक भवन जिले की शान माना जा रहा है। लेकिन अंदर कक्षाओं की जगह सन्नाटा पसरा है। चर्चा है कि इस संस्थान को कुसमी से हटाकर बलरामपुर के किसी पुराने भवन में शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है।

स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि सपनों पर चोट जैसा है। उनका कहना है—“जब सब कुछ तैयार है, तो फिर बदलाव क्यों?”
चुप्पी जो सवाल बन गई

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात है जनप्रतिनिधियों की खामोशी। न कोई विरोध, न कोई पहल। छात्र संगठन भी अब तक सक्रिय नहीं दिखे।

कुसमी के लोगों का कहना है कि अगर यही चुप्पी रही, तो उनका क्षेत्र एक बड़े शैक्षणिक मौके से वंचित हो जाएगा।

सिर्फ संस्थान नहीं, विकास की कुंजी

डीआईईटी सिर्फ एक कॉलेज नहीं, बल्कि पूरे इलाके के विकास की धुरी बन सकता है। यहां से प्रशिक्षित शिक्षक निकलेंगे, रोजगार बढ़ेगा और शिक्षा का स्तर सुधरेगा।

अब सवाल—फैसला बदलेगा या भविष्य?

क्या शासन अपने फैसले पर कायम रहेगा या कुसमी का डीआईईटी फाइलों में ही सिमट कर रह जाएगा?

फिलहाल, कुसमी में एक ही चर्चा है—
“भवन तैयार है, पर पढ़ाई कब शुरू होगी?”

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