जग्गी मर्डर केस में बड़ा धमाका: अमित जोगी को सरेंडर का आदेश, सियासत में हड़कंप,

📍रायपुर/बिलासपुर | विशेष रिपोर्ट


छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में एक बार फिर बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी को विशेष अदालत से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी याचिका खारिज करते हुए उन्हें 21 दिनों के भीतर न्यायालय में आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 4 जून 2003 का है, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता रामावतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय प्रदेश में अजीत जोगी की सरकार थी। इस हत्याकांड में अमित जोगी सहित 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। आरोप है कि हत्या राजनीतिक रंजिश के चलते करवाई गई थी।

अदालत ने क्या कहा?

हालिया सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए राहत देने का कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि कानून की प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है और अमित जोगी को 3 सप्ताह के भीतर सरेंडर करना होगा।

अमित जोगी के सामने क्या विकल्प?

* अदालत के इस फैसले के बाद अमित जोगी के पास अब सीमित विकल्प बचे हैं—
* सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करना
* उच्च अदालत से स्टे नहीं मिलने पर सरेंडर करना
* सरेंडर के बाद न्यायिक हिरासत का सामना

राजनीतिक असर

इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष को सरकार और जोगी परिवार पर हमला करने का मौका मिल गया है, वहीं JCCJ के लिए यह एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

आगे क्या?

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमित जोगी की कानूनी टीम आगे क्या रणनीति अपनाती है। क्या वे सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे या तय समय सीमा के भीतर सरेंडर करेंगे—यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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