सूरजपुर/कौशलेन्द्र यादव – जिले के दूरस्थ चांदनी क्षेत्र में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को जीवनदान देने वाला पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) अब इतिहास बनता जा रहा है। 18 जनवरी 2023 को प्रारंभ किया गया यह केंद्र, जहां बच्चों के साथ उनकी माताओं के ठहरने और भोजन की व्यवस्था भी थी, मात्र एक व्हाट्सएप संदेश के जरिए 5 फरवरी 2025 को अचानक बंद कर दिया गया।
यह निर्णय न केवल कुपोषण से लड़ाई के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि इसे ‘संजीवनी’ मानने वाले ग्रामीणों की उम्मीदों पर भी पानी फेरता है।
वेतन से वंचित कर्मचारी, अनसुनी शिकायतें
इस केंद्र में कार्यरत कर्मचारियों को जुलाई 2024 से फरवरी 2025 तक का वेतन अब तक नहीं मिला है। कर्मचारी तुलेश्वर जायसवाल ने मुख्यमंत्री जनदर्शन से लेकर सोशल मीडिया तक भ्रष्टाचार की आशंका जताई है। वहीं, तुलसी जायसवाल, उपसरपंच, अवंतिकापुर, ने 24 मार्च 2025 को कलेक्टर सूरजपुर को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
150 हितग्राही माताएं बनीं ठगी की शिकार
दिसंबर 2023 से फरवरी 2025 के बीच लगभग 150 हितग्राही महिलाएं अपने बच्चों को सुपोषित करने के लिए केंद्र में 15 से 20 दिन तक रुकी थीं। उन्हें विभाग द्वारा ₹2250 की प्रोत्साहन राशि देने का वादा किया गया था, जो आज तक नहीं मिला।
अब सवाल उठता है — कौन हड़प गया इन माताओं की मेहनत की राशि?
श्रीमती पार्वती यादव का भविष्य अधर में
पोषण पुनर्वास केंद्र, बिहारपुर में पदस्थ श्रीमती पार्वती यादव की नियुक्ति के समय आयु 40 वर्ष थी। अब वे 42 वर्ष की हो चुकी हैं। केंद्र के बंद होने से उनकी नौकरी चली गई और आयु सीमा पार कर जाने के कारण पुनः नियोजन की संभावना भी लगभग समाप्त हो गई है। यह सिर्फ एक महिला नहीं, बल्कि एक भविष्य के साथ अन्याय है।
प्रशासन से अहम सवाल
क्या चांदनी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में पुनः पोषण पुनर्वास केंद्र खोला जाएगा?
क्या कर्मचारियों को उनका बकाया वेतन मिलेगा?
क्या हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि लौटाई जाएगी?
क्या इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होगी?
जरूरत जवाबदेही की है
पोषण पुनर्वास केंद्र की यह अनदेखी शासन की एक बड़ी उपलब्धि को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते हुए दर्शाती है।
आज जरूरत है जिम्मेदारियों की जवाबदेही तय करने की, ताकि आने वाले समय में कुपोषण के खिलाफ चल रही लड़ाई कमजोर न पड़े।
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