सूरजपुर/कौशलेन्द्र यादव– जिला मुख्यालय सूरजपुर में उस समय हैरानी की स्थिति बन गई जब खुद कलेक्टर कार्यालय परिसर स्थित प्रतिलिपि शाखा में ही निर्धारित समय से पहले ताले लटकते नजर आए। कार्यालय बंद करने का नियत समय शाम 5:30 बजे है, लेकिन आज शाम 5:00 बजे ही कार्यालय बंद मिला। हमारे संवाददाता को सूचना मिली तो मौके पर पहुँचकर जीपीएस युक्त कैमरे से तस्वीर भी ली गई, जो समय से पूर्व कार्यालय बंद होने की पुष्टि करती है।
इस संबंध में जब संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई, तो उन्होंने मामले की जांच कर कार्रवाई करने की बात कही। लेकिन सवाल यह उठता है कि जहां स्वयं कलेक्टर बैठते हैं, वहां ही यदि इस तरह की मनमानी होगी तो जिले के अन्य कार्यालयों की स्थिति का अंदाज़ा सहज ही लगाया जा सकता है।
दूरदराज़ गांवों से प्रतिलिपि शाखा में नकल प्राप्त करने आए कई ग्रामीणों को आज निराश लौटना पड़ा। एक ग्रामीण ने बताया, “मैं ₹200 किराया खर्च कर यहां आया, लेकिन कार्यालय समय से पहले बंद हो गया। अब कल फिर किराया लगाकर आना पड़ेगा, तब जाकर शायद काम हो पाए।” ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर यही हाल रहा तो आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
यह घटना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। क्या आम जनता को समय पर सेवा देने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं अधिकारी? क्या कलेक्टर साहब को इस पूरे मामले की जानकारी है? अगर मुख्यालय में ही ऐसे हालात हैं, तो तहसील, जनपद और ब्लॉक स्तर पर स्थिति कैसी होगी, इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।
प्रशासन से अपेक्षा है कि वह इस मामले में संज्ञान लेकर समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करे और लापरवाह कर्मचारियों पर उचित कार्रवाई करे।
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