रायपुर में एक बार फिर से संवेदनशील तस्वीरे देखने को मिली है जहां विभाग द्वारा मरीज के साथ आने वाले परिजनों के रुकने की कोई भी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है और वे बड़े मार्मिक रूप से पार्किंग स्थल में सोने को मजबूर है साथ ही ये बड़ी विडम्बना ही है कि उन परिजनों को टिन के शेड में उबलती 45 डिग्री गर्मी में रुकने को मजबूर होने के साथ ही इस बेचैन कर देने वाली गर्मी को खुले में झेलनी पड़ रही है, गौरतलब है कि इस उफनती गर्मी में उन्हें पंखे की सुविधा तक नहीं दी जा रही है वही एक और दृश्य देखने को मिला जहाँ गार्ड ठंडे कूलर का मज़ा ले रही है।
आप को बतादे की शासन– प्रशासन के द्वारा अस्पतालों के उत्थान के लिए समय समय पर नए नए योजनाओं का क्रियान्वन करती रहती है और इसी तारतम्य में शहर के घड़ी चौक में इस अस्पताल को खुले लगभग 15 से 20 वर्ष बीत चुके है मगर अब तक इस अस्पताल का कायाकल्प नही हो सका है और आज भी लचर व्यवस्था साफ दिखाई पड़ रही । कल रात की बात करे तो रायपुर शहर में बहुत ज्यादा बरसात हुई थी मरीज के साथ आये परिजनों का कहना है कि पानी गिरने के कारण हम सारी रात सो नही पाए और नींद पूरी नही हुई 10 से 15 साल बीत जाने के बावजूद अब तक दिगर जिले से आने वाले परिजनों के सोने की व्यवस्था अब तक यह अस्पताल कर नहीं सका है साथ जल्द वर्षा ऋतु आने का समय निकट आ चुका है देखने वाली बात होगी कि अब क्या प्रशासन इस ओर किसी प्रकार से व्यवस्था करेगा साथ ही आप को यह भी बतादे की देश मे कोरोना ने फिर से दस्तक दी है और रायपुर शहर में औसतन केस निकल भी चुके है अब देखने वाली बात है इन्हें कोरोना से बचाने के लिए क्या सुविधाएं दी जाएगी।
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