सूरजपुर कौशलेन्द्र यादव ,जिला अस्पताल, इन दिनों अव्यवस्थाओं और लापरवाह स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर फिर एक बार सवालों के घेरे में है। आम नागरिकों ने अस्पताल की बदहाली को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर नाराजगी जाहिर की है।
एक उपयोगकर्ता ने लिखा कि ” रात को आपातकालीन डॉक्टर के पास बुखार नापने तक का यंत्र उपलब्ध नहीं था, हवा-हवाई में इलाज चल रहा है।” इससे स्पष्ट है कि इमरजेंसी सेवाएं भी आवश्यक उपकरणों के अभाव में हैं।
दूसरे पोस्ट में युवावर्ग के डॉक्टरों की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा गया, “सब भगवान भरोसे चल रहा है, जितने यंग डॉक्टर हैं उनमें से अधिकांश खुद नशे की गिरफ्त में हैं। भगवान ही बचाए इन यमदूतों से।”
एक अन्य व्यक्ति ने दावा किया, “अस्पताल के डॉक्टर सरकार से वेतन तो लेते हैं, लेकिन मरीजों को इलाज के लिए अपने निजी क्लीनिक भेजते हैं। सरकारी अस्पताल को बदनाम कर निजी मुनाफा कमाने में लगे हैं।”
इन सभी पोस्ट से स्पष्ट होता है कि जिले के नागरिक स्वास्थ्य सेवाओं से बेहद असंतुष्ट हैं। सोशल मीडिया पर उठ रही आवाजें जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत को उजागर कर रही हैं।
जिला अस्पताल प्रबंधन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस विषय में अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन आम जनता यह मांग कर रही है कि इन मामलों की जांच हो और दोषी चिकित्सकों पर कार्रवाई की जाए।
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