खबर का असर: मोतीनगर पंचायत में गबन की पुष्टि, सरपंच-सचिव पर कार्रवाई तय

खबर का असर:

✍️ दुर्गेश गुप्ता

कुसमी/बलरामपुर

विकास के नाम पर लाखों की लूट, जांच में सरपंच–सचिव पूरी तरह बेनकाब कागजों में ढोढ़ी-मुरमीकरण, जमीन पर काम तक नहीं!

बलरामपुर जिले के जनपद पंचायत कुसमी अंतर्गत ग्राम पंचायत मोतीनगर में विकास योजनाएं नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का संगठित खेल चल रहा था। सरपंच और पंचायत सचिव की आपसी मिलीभगत से शासकीय राशि को योजनाबद्ध तरीके से हजम कर लिया गया।

अब जनपद पंचायत की जांच ने इस पूरे घोटाले पर मुहर लगा दी है।


ढोढ़ी निर्माण, खुदाई एवं मुरमीकरण जैसे बुनियादी विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये की राशि निकाल ली गई, लेकिन जब जमीनी सच्चाई सामने आई तो पूरा विकास सिर्फ फाइलों तक ही सीमित नजर आया। मौके पर न ढोढ़ी मिली, न मुरमीकरण, न ही किसी तरह का निर्माण कार्य—सिर्फ भ्रष्टाचार के निशान।


ग्रामीणों और वर्तमान सरपंच द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद जब हमारे संवाददाता ने ग्राउंड जीरो पर जाकर पड़ताल की, तो पंचायत में चल रही लूट की पोल खुल गई। खबर प्रकाशित होने के बाद जनपद पंचायत को मजबूरी में जांच करानी पड़ी।
जांच प्रतिवेदन में सरपंच एवं पंचायत सचिव को स्पष्ट रूप से दोषी पाया गया है। रिपोर्ट में यह भी माना गया है कि शासकीय राशि का दुरुपयोग और गबन हुआ है, जिसे किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता।


इस मामले में जनपद पंचायत कुसमी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. अभिषेक पाण्डेय ने बताया कि पंचायत राज अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई का प्रस्ताव उच्च कार्यालय को भेज दिया गया है। आदेश मिलते ही पंचायत सचिव को निलंबित किया जाएगा और आगे की वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी।
इधर, ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है। उनका साफ कहना है कि यदि दोषियों से गबन की गई शासकीय राशि की वसूली नहीं हुई और कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह माना जाएगा कि भ्रष्टाचार को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है।


अब सवाल सिर्फ मोतीनगर पंचायत का नहीं है, सवाल पूरे सिस्टम पर है— क्या दोषियों पर सिर्फ दिखावटी कार्रवाई होगी या फिर भ्रष्टाचारियों को वास्तव में सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा?

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