आंगनबाड़ी भवनों की बदहाली: सूरजपुर जिले में 311 केंद्र अब भी किराए के मकानों में संचालित मंत्री का गृह जिला होने के बावजूद बच्चों को नहीं मिला सुरक्षित भवन, बरसात में और बिगड़े हालात

Anganwadi buildings in bad condition: 311 centres in Surajpur district are still operating in rented houses Despite being the minister's home district, children did not get safe buildings, conditions worsened during the rainy season

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VIRAT DUBEY

 

सूरजपुर कौशलेन्द्र यादव। महिला एवं बाल विकास मंत्री के गृह जिला सूरजपुर में ही विभाग की जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। जिले में कुल 2080 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें से 311 केंद्र आज भी खुद के भवन के अभाव में किराए के जर्जर मकानों में संचालित हो रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा और सुविधा के प्रति घोर लापरवाही देखने को मिल रही है।

बरसात के इन दिनों में इन भवनों की हालत और बदतर हो गई है। कई केंद्रों में साफ-सफाई का घोर अभाव है। फर्श कीचड़ से लथपथ हैं और दीवारें सीलन से भीग चुकी हैं। कुछ केंद्रों में तो बच्चों को बिच्छू और अन्य जहरीले कीड़ों का भी डर बना रहता है, जिससे नन्हे-मुन्ने बच्चों की जान पर भी बन आती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ जहां सरकार कुपोषण मुक्त अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर बच्चों के लिए बुनियादी ढांचे तक का अभाव है। आश्चर्य की बात तो यह है कि यह वही जिला है जहां की विधायक स्वयं महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं, लेकिन विभागीय अमला और जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलकर जमीनी हालात जानने की जहमत नहीं उठा रहे।

विभागीय सूत्रों की मानें तो “रेडी टू ईट” (पूर्व-तैयार पोषण आहार) योजना में भी भारी गड़बड़ियां सामने आई हैं। यदि पूर्व में पदस्थ अधिकारियों की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच की जाए, तो कई अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं।

जनता और जागरूक नागरिकों की मांग है कि जिले के सभी आंगनबाड़ी भवनों की तत्काल समीक्षा हो, जर्जर भवनों को दुरुस्त किया जाए और जहां भवन नहीं हैं वहां जल्द से जल्द नए भवनों का निर्माण हो। साथ ही रेडी टू ईट योजना में हुई गड़बड़ियों की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदारों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।

*जिला कार्यक्रम अधिकारी ने दी सफाई, नए भवनों का प्रस्ताव शासन को भेजा गया*

महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल ने बताया कि जिले में वर्तमान में 186 आंगनबाड़ी भवन निष्कासित हो चुके हैं। इनकी जगह नए भवनों के निर्माण हेतु प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए बच्चों की सुरक्षा व शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए फिलहाल किराए के भवनों की संख्या में अस्थायी रूप से वृद्धि की गई है।
जैसे ही बारिश का मौसम समाप्त होगा, किराए के भवनों की संख्या में कमी लाते हुए स्थायी भवन निर्माण की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। स्वच्छता को लेकर उन्होंने कहा कि विभाग इसे प्राथमिकता के आधार पर देख रहा है और सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को साफ-सफाई बनाए रखने के स्पष्ट निर्देश दिए जा रहे हैं।

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